15 नवंबर 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के कई कारण रहे. महागठबंधन पिछली बार के 37.2 प्रतिशत वोटों पर ही अंटका रहा, जबकि एनडीए ने पिछले 37.3 प्रतिशत वोटों के मुकाबले इस बार 10 प्रतिशत से अधिक वोट जोड़े. एनडीए को 47.7 प्रतिशत वोट इस बार मिले हैं. बहरहाल महागठबंधन के पिछड़ने के कारणों पर गौर करें तो कई ऐसी बातें उभर कर सामने आती हैं, जो महागठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचाने का कारण बनीं.
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद इस बात की समीक्षा होगी कि महागठबंधन की इतनी बुरी गत क्यों हुई. महागठबंधन की पार्टियों को वोट भी ठीकठाक मिले. मुकाबला भी कांटे का दिखा. पर, सीटों में यह तब्दील नहीं हुआ. महागठबंधन को 243 मे सिर्फ 34 सीटों से संतोष करना पड़ा. एनडीए ने 200 से अधिक सीटें जीत कर भारी बहुमत हासिल कर लिया है. जहां तक वोट शेयर की बात है, महागठबंधन पिछली बार के 37.2 प्रतिशत वोटों पर ही अंटका रहा, जबकि एनडीए ने पिछले 37.3 प्रतिशत वोटों के मुकाबले इस बार 10 प्रतिशत से अधिक वोट जोड़े. एनडीए को 47.7 प्रतिशत वोट इस बार मिले हैं. बहरहाल महागठबंधन के पिछड़ने के कारणों पर गौर करें तो कई ऐसी बातें उभर कर सामने आती हैं, जो महागठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचाने का कारण बनीं.
हार के कारण
बिहार का प्रमुख पर्व छठ समाप्त होते ही राहुल गांधी 29 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर आए थे. वहां उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी को छठ पूजा से कोई लेना-देना नहीं. उन्हें सिर्फ वोट चाहिए. इसके लिए वे मंच पर डांस-ड्रामा भी कर देंगे. इसे बिहार में आस्था के पर्व छठ का अपमान माना गया. सत्ताधारी एनडीए ने इसे छठ और बिहार का अपमान बताया. भाजपा ने इसे राहुल की हिन्दू विरोधी आचरण बताया. राहुल के इस बयान के कारण भाजपा हिन्दू वोटों को ध्रुवीकृत करने में कामयाब रही. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल को चेतावनी दी कि इसकी कीमत राहुल को चुनाव में चुकानी पड़ेगी. मुजफ्फरपुर कोर्ट में इसे लेकर राहुल के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया गया है. भाजपा या एनडीए को छोड़ भी दें तो तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने इसे लेकर राहुल पर तल्ख टिप्पणी की- ‘राहुल को छठ का ज्ञान ही नहीं, वे विदेश घूमते हैं.’ महागठबंधन की चुनाव में दुर्गति हुई है तो इसका एक कारण राहुल का बयान भी है.
