लखनऊ, 08 अक्टूबर, 2026: बृहस्पतिवार को कृषि भवन सभा कक्ष में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में कृषि विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में कृषि मंत्री ने सभी योजना अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के लिए निर्धारित बजट का समय से सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे स्वयं धरातल पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करें और विभिन्न कृषि विकास कार्यों की गुणवत्ता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करें।
समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में क्षतिपूर्ति के अधिक दावे किए गए हैं वहां सर्वे की गति को तेज कर भुगतान की कार्यवाही की गति दी जाए। इनमें मुख्य रूप से महोबा, जालौन, ललितपुर, झांसी, चित्रकूट, मिर्जापुर आदि जनपद शामिल हैं। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत विभागीय योजनाओं की वित्तीय प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया गया। कृषि विभाग के लिए कुल 10,017.45 करोड़ रुपये का बजट प्राविधान किया गया है, जिसके सापेक्ष 5,085.51 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति जारी हो चुकी है और अब तक 2,946.84 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। योजनाओं के स्तर पर 8,386.94 करोड़ रुपये के प्राविधान में से 3,455.61 करोड़ रुपये की स्वीकृति के सापेक्ष 2,393.66 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो स्वीकृति के सापेक्ष 69.27 प्रतिशत प्रगति दर्शाता है। कृषि मंत्री ने अवशेष धनराशि का समयबद्ध उपभोग करने के साथ ही केंद्र एवं राज्य पोषित योजनाओं को तय समय-सीमा में पूर्ण करने पर बल दिया।

आगामी रबी अभियान 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि प्रदेश में रबी फसलों के लिए कुल 12 लाख कुंतल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 10.45 लाख कुंतल गेहूं, 69.96 हजार कुंतल चना, 41.76 हजार कुंतल मसूर और 17.89 हजार कुंतल मटर शामिल हैं। इसके साथ ही दलहन एवं तिलहन के 7.65 लाख से अधिक निःशुल्क मिनीकिट वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बीज वितरण एवं विभिन्न जनपदों में अवशेष लक्ष्यों की पूर्ति में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।
बैठक में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए फसलों की प्रजातियों के अनुसार अधिकतम अनुदान की व्यवस्था में मसूर की 8 वर्ष से कम अवधि की समस्त प्रजातियों पर सर्वाधिक 100 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जबकि चना (8 वर्ष से कम अवधि), मटर (8 वर्ष से कम अवधि) तथा मसूर (10 वर्ष से कम अवधि) की प्रजातियों पर 75 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है; इसके अलावा गेहूँ (10 वर्ष से कम व अधिक दोनों), जौ (10 वर्ष से कम व अधिक दोनों), चना (10 वर्ष से कम अवधि), मटर (10 वर्ष से कम अवधि), तोरिया (15 वर्ष से कम अवधि) तथा राई/सरसों (15 वर्ष से कम अवधि) की समस्त प्रजातियों पर अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त रबी 2026-27 के लिए उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण पर भी गहन चर्चा हुई। राज्य में कुल 68.50 लाख मीट्रिक टन उर्वरक के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 34.19 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया जा चुका है, जिसमें 16.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 6.76 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 5.58 लाख मीट्रिक टन एनपीके शामिल है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सहकारिता एवं निजी दोनों क्षेत्रों में उर्वरकों की निरंतर निगरानी रखी जाए, ताकि रबी की बुवाई के समय किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
इस अवसर पर कृषि निदेशक टीएम त्रिपाठी, निदेशक बीज प्रमाणीकरण कनीज फातिमा, सचिव उपकार डॉ. राजेश दुबे कृषि विभाग के अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।
