SC की 3 जजों की पीठ AMU के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे को तय करेगा
नई दिल्ली,8 नवंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संविधान के अनुच्छेद 30 (ए) के तहत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। सात जजों की संविधान पीठ ने 4:3 के बहुमत से यह निर्णय दिया कि AMU का अल्पसंख्यक दर्जा कायम रहेगा, जनतक की SC की 3 जजों की पीठ AMU के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का मानदंड तैयार नहीं कर लेता। इस फैसले को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया।
फैसले के मुताबिक, चीफ जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस एसके खन्ना, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा का एकमत निर्णय था कि AMU का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखा जाए। दूसरी ओर, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इससे असहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने 1967 के उस फैसले को खारिज करते हुए AMU को अल्पसंख्यक दर्जा देने का नया आधार तैयार करने की बात कही जिसे आगे तीन जजों की बेंच में विस्तार से परखा जाएगा।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 24 मई 1920 को हुई, जिसे भारत के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। इस शिक्षण संस्थान की नींव महान समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान ने रखी थी। 1877 में सर सैयद ने आधुनिक शिक्षा की आवश्यकता को देखते हुए मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की थी, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ।
1857 की क्रांति के बाद सर सैयद अहमद खान को आधुनिक शिक्षा का महत्व समझ में आया और वे इसे भारतीय मुसलमानों के बीच फैलाने के लिए प्रतिबद्ध हो गए। इस विचार के तहत वे 1870 में इंग्लैंड गए और ऑक्सफोर्ड व कैंब्रिज जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों का अध्ययन किया। अंग्रेजी शासन के प्रति सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्होंने अपने विचारों को शिक्षा के माध्यम से साकार किया।
अलीगढ़ लौटकर सर सैयद ने मात्र सात छात्रों के साथ एक मदरसे की शुरुआत की, जो बाद में मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज और अंततः 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। आज AMU न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के रूप में प्रसिद्ध है, जो शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में सर सैयद अहमद खान की प्रेरणा का प्रतीक बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से AMU का अल्पसंख्यक दर्जा सुरक्षित हो गया है, जो संस्थान के छात्रों और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
